
संतकबीरनगर। गुरुवार को जिले के विकास भवन परिसर में रोजगार सेवकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार पांडेय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जिलाधिकारी (डीएम), मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

धरना दे रहे कर्मचारियों ने बताया कि राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) तथा विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के प्रभावी संचालन के लिए लगभग 44 हजार कर्मचारी संविदा के आधार पर कार्यरत हैं। इनमें ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखा सहायक और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी जैसे पद शामिल हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से इन योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने में योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय पर कार्य करना पड़ रहा है, वहीं मानदेय भी कई बार तीन से चार महीने की देरी से मिलता है।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने मांग की कि उत्तर प्रदेश में भी मनरेगा कर्मचारियों का मानदेय बिहार, तमिलनाडु, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की तर्ज पर बढ़ाया जाए। साथ ही शिक्षामित्रों, अंशकालिक शिक्षकों व अनुदेशकों की तरह मनरेगा कर्मचारियों को भी पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाए, ताकि उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
इसके अलावा कर्मचारियों ने करीब चार वर्ष पूर्व लखनऊ के डिफेंस एक्सपो मैदान में मुख्यमंत्री द्वारा मनरेगा कर्मचारी सम्मेलन में घोषित एचआर पॉलिसी को तत्काल लागू करने की भी मांग उठाई।
धरना-प्रदर्शन में श्यामलाल चौधरी, तीर्थराज मौर्य, राम अनुज, राजाराम त्यागी, कन्हैयालाल, अजय कुमार, अशोक कुमार, दुर्गेश उपाध्याय, आराधना चौधरी, किरण चौधरी, पवन कुमार, शिव मूरत, अमरनाथ यादव, वीरेंद्र सिंह और रीता देवी सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।



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