सहजनवा गोरखपुर– माँ सती एक दिन कैलासवासी शिव के दर्शन किये। और वह उनके प्रेम में पड़ गयी । लेकिन सती प्रजापति दक्ष के इच्छा के विरुद्ध शिव से विवाह कर ली।दक्ष इस विवाह से सन्तुष्ट नही थे।क्यो की सती ने अपनी मर्जी से एक ऐसे व्यक्ति से शादी की थी । जिसका वेशभूषा और शक्ल दक्ष को पसंद नही था। जो अनार्थ था। दक्ष ने एक विराट यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें पुत्री और दामाद को निमंत्रण नही भेजा। फिर भी सती यज्ञ में बिना बुलाये पहुच गयी। जिसे देखकर दक्ष ने काफी नाराज हुए। और पति के बारे में अपमानजक बाते कही। और वह बर्दाश्त नही कर पाई।और यज्ञ कुंड में कूद कर प्राण त्याग दिया। बस यही से सती के शक्ति बनने की कहानी शुरू हुई। दुखी शिव ने वीरभद्र को भेजा । जो दक्ष के सिर काट लाये। शिव ने दक्ष के सिर को धारण कर खूब नृत्य किये।उक्त बातें अवधधाम से पधारे श्री बाल बिदेश्वरी केश्वरी ने ग्राम पंचायत खीरीडाड़ में आयोजित श्री,श्री विष्णु महायज्ञ में भक्तों को रसपान कराते हुए कही।इस अवसर परप्रधान विजय कुमार उर्फ त्रिपुरारी,रामसजन,दिनेश यादव,अनन्तलाल,रामवचन,कृपाल यादव,त्रिवेनी गोंड़,धीरेंद्र यादव,जयचंद,बहाऊ,छोटेलाल सहित अनेक भक्त मौजूद थे।
सती ने पिता के इच्छा के विरुद्ध शिव से रचाई थी शादी



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