संतकबीरनगर।सरकार की ओर से सरकारी स्कूल में सभी बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिया जाता है ताकि बच्चे रोजाना आये उन्हें पर्याप्त पोषण मिलता रहे।इसके लिए सरकार ने मिड डे मील योजना की शुरुआत की है।इस योजना के तहत सरकार बच्चों को शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य और पोषित बनाना चाहती है।लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बया कर रही है यहाँ आलम यह है कि बच्चों का निवाला डकार जा रहे है।शिक्षा देने वाले ही जब भ्रष्ट बन जायेंगे तो क्या होगा? विकास खण्ड बेलहर कला के दुल्हीपार ग्राम पंचायत में बने कम्पोजिट विद्यालय में बच्चों के निवाले पर डाका जा रहा है, सरकार के मानक के अनुसार प्रत्येक प्राथमिक के बच्चों को 1.50 एम.एल. और उच्च प्राथमिक के बच्चों को 200 एम.एल दूध की व्यस्था की जाती है लेकिन कम्पोजिट विद्यालय दुल्हीपार में 2.50 लीटर दूध में सभी बच्चों को पिलाकर पूर्ति कर ली जाती है स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि हमारे स्कूल में 217 बच्चों को पंजीकरण है तो इस हिसाब से अगर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक में आधे आधे की संख्या हो तो 16.2 लीटर प्राथमिक में और 21.6 लीटर दूध उच्च प्राथमिक के बच्चों को दूध की व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन संख्या कम ज्यादे होने पर उसी हिसाब से दूध को कम और अधिक करना चाहिए, हमारी टीम द्वारा सर्वे किया गया तो 90 बच्चों पर 2.50 लीटर दूध मिला जबकि 1.50 एम.एल के हिसाब से 13.5 लीटर दूध की व्यस्था होनी चाहिए थी, इस प्रकार से बच्चे की पोषण की गुडवत्ता क्या रहेगी, यह तो इनके अधिकारी या कर्मचारी ही बता पायेंगे, खंड शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल पहुंच से बाहर था।
कम्पोजिट विद्यालय में बच्चों के निवाले पर प्रधानाध्यापक द्वारा डाला जा रहा डाका



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