सहजंनवा हरपुर – बुदहट । मां जानकी ने प्रभु राम के वन गमन के समय उनका साथ ही नहीं,वल्कि हर दुख-सुख में उनकी सहचरी बनीं रहीं । जो दुनियां की नारियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत कर दिया । उक्त बातें अयोध्या धाम से पधारीं साध्वी गौरांगी जी ने कहीं । वह ग्राम गोरेडीह के माता समय जी एवं राम-जानकी मंदिर परिसर में चल रहे श्री राम महायज्ञ के पांचवें दिन कथा व्यास से श्रद्धालुओं को कथा रसपान करा रहीं थीं । उन्होंने कहा कि वनवास की खबर से समस्त अयोध्या वासी बहुत दुखी थे, परंतु राम के साथ उनकी नव विवाहित पत्नी के साथ खड़ा होते देख कर वहां की नारियां अपने को गौरवान्वित महसूस करने लगीं । साध्वी ने कहा कि-अत्री मुनि के आश्रम पर जब माता अनुसुइया ने पति और देवर के साथ जब वल्कल वस्त्र में माता जानकी को देखा,तो भाव विभोर हो गई । कहा बेटी तुं दुनियां की नारियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है । सब कुछ छिन जाने के बाद भी, दुख में आप ने अपने पति का साथ नहीं छोड़ा कदम से कदम मिलाकर साथ खड़ी हो । उक्त अवसर पर श्री मती मंदाकिनी देवी , राम अनुज सिंह , ग्राम प्रधान गिरजेश यादव , विनय कुमार मद्धेसिया, सुनील सिंह, अवधेश सिंह, हनुमान यादव,भरत सिंह, वीरेंद्र यादव,अनंद कन्नौजिया, परमात्मा यादव समेत अनेक लोग मौजूद रहे ।
नारियों की आदर्श थीं माता जानकी-साध्वी गौरांगी जी



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