कृष्णा पंडित की कलम से

गेरुआ वस्त्र माथे पर चंदन हाथों में पुष्प और मां गंगा के चरणों में वंदन के साथ 71 वर्ष की उम्र में जब देश का प्रधानमंत्री ठंड के इस दिसंबर माह में डुबकी लगाकर आदित्य देव को अर्घ देते हुए हुंकार भरते हैं तो हां हम सनातनीओं हिंदुओं और हिंदुत्व को मानने वाले को अपने प्रधानमंत्री और उनके हुंकार पर गर्व ही नहीं खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं कि आज का बदला भारत जिसका सिरमौर और नेतृत्व मोदी जी जैसे शक्तिशाली राजनेता के हाथों में है जिनकी शुद्ध नीति और हिंदुत्व की सुरक्षा व संरक्षण से जुड़ी कार्यशैली दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हिंदुस्तानियों को अगाध प्रेम परोसती है जो देवाधीदेव महादेव की नगरी काशी में देखने को भरपूर मिला…
हां 130 करोड़ जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला देश का पहला प्रधानमंत्री हिंदुत्व के लिए जीता है…
जब कभी पहले किसी राजनेताओं के यहां छोटी सी आयोजन या कार्यक्रम होता तो वहां करोड़ों रुपए का खर्च आम बात होती है विदेशों से छोटी-छोटी चीज मंगाई जाती है जैसे फूल सामग्री और तो और मेहमानों की मेहमाननवाजी में इन नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी.. देश की संपत्ति और पैसों पर अपना आधिपत्य कर आम जनता का खून चूसने का कार्य करते रहे बड़े बड़े अखबारों और चैनलों में उनके घर की शादियां दिन भर चलती रही लेकिन वहां कोई सवाल नहीं था क्योंकि आजादी के बाद व नेता जी जैसा दिखाया वह सिर्फ उनके उपभोग का साधन रहा जबकि सरदार पटेल जैसे भी नेता थे जिन्होंने जनता सेवा ही अपना धर्म मान कर पूरी जीवन साधारण रूप से व्यतीत किया वहीं दूसरी तरफ कुछ बहरूपिया नेता बाह़्य आडंबर को अपनाकर भारत को भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ लिया…
जंजीरों में जकड़ी मां भारती को भी इनकी आजादी रास नहीं आई…
धीरे धीरे कर इनका जवाब और इनकी करनी को जनजन तक पहुंचाने के लिए एक विपक्षी पार्टी का उदय हुआ जो आज भाजपा के रूप में स्थापित है जिसने कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को नेस्तनाबूद कर हिंदुस्तानियों के दिल में एक अपनी विशेष जगह और पहचान बना ली है..!
मंदिर ही है जो आजादी के पूर्व से आजादी के बाद भी अपने स्थल पर डटे रहे जिनकी गूंज और घंटी की करतल ध्वनि ने हिंदुत्व को जिंदा रखा..
काशी कॉरिडोर धाम नव निर्माण व उद्घाटन से कुछ नेताओं और खालिस्तानीयों के पेट में दर्द हो रहा है जिसका इलाज आने वाले दिनों में मथुरा में श्री कृष्ण मंदिर निर्माण के बाद ही हो सकता है तो सजग रहें और तैयार रहें तभी जाकर श्रीकृष्ण की सभी लीलाओं का वर्णन हम सभी मथुरा में देखकर आनंदित हो सकते हैं… कुछ लोग खर्च और उसकी लेखा-जोखा पूछ रहे हैं उनको मैं बता दूं जब उनके बहरूपिया हिंदू आका अपने घर किसी आयोजन में करोड़ों रुपए खर्च करते हैं तो क्या वह खर्च कभी किसी आम जनता को दिया या उनके दादा परदादा ने नोट उगाने वाले पौधा अपने बगीचे में लगा रखे थे.. नपुंसक हैं वह लोग जो अपनी बदनियति उजागर कर श्री काशी विश्वनाथ का अपमान कर रहे हैं दुनिया जानती है तुम्हारी पूर्व की राजनीति की तस्वीर जहां तुमने कैसे लोगों को छला है और अपने लोगों को कैसे पाला है. सिर्फ स्वार्थ के लिए इतिहास के पन्ने बदल दिए यही नहीं धन इतने इकट्ठे किए की रखने की जगह नहीं बची अब तुम्हारी खैर नहीं तुम पनाह मांगोगे जनता जवाब देगी वजूद के लिए तरसोगे !
यह तो बाबा विश्वनाथ के धाम का निर्माण का और जनमानस के हृदय की स्वाभिमान के साथ आस्था का सवाल है।



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