रखरखाव के नाम पर हर महीने भुगतान, लेकिन शौचालय की हालत बद से बदतर

संतकबीरनगर (सांथा )। विकास खंड सांथा क्षेत्र के ग्राम पंचायत धौरहरा में बना सामुदायिक शौचालय “स्वच्छ भारत मिशन” की मंशा को धता बता रहा है। मौके पर पहुंचने पर शौचालय की हालत देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो यह कभी उपयोग में ही नहीं आया। फाटक टूटी पड़ी है, अंदर शौचालय की शीटें जर्जर हैं और चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

सरकार ने गांवों में सामुदायिक शौचालय बनवाकर स्वच्छता अभियान को गति देने की योजना चलाई थी, लेकिन धौरहरा का शौचालय रखरखाव के अभाव में शोपीस बनकर रह गया है।
हैरानी की बात यह है कि हर महीने रखरखाव और सफाई के लिए नियुक्त केयर टेकर को मानदेय का भुगतान किया जा रहा है, फिर भी शौचालय की दुर्दशा देखकर जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

जब इस संबंध में डीपीआरओ को अवगत कराया गया तो उन्होंने एडीओ पंचायत सांथा को तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है।
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा यही है कि अक्सर ऐसे मामलों में जांच और रिपोर्ट तो बनती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन सच में कदम उठाएगा या फिर यह शिकायत भी “हिल्ला हवाली” का शिकार होकर फाइलों में दब जाएगी।
धौरहरा का यह शौचालय सिर्फ एक निर्माण की खामी नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।



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