
संतकबीरनगर। खेती में श्रमिकों की कमी और बढ़ती लागत के बीच आधुनिक कृषि यंत्र किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। पावर वीडर/टिलर छोटे और मध्यम जोत वाले किसानों के लिए खेती के विभिन्न कार्यों में सहायक बन रहा है। इससे खेत की तैयारी, निराई-गुड़ाई और कतार वाली फसलों में खरपतवार नियंत्रण का कार्य कम समय और कम श्रम में किया जा सकता है।
कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डा. देवेश कुमार ने बताया कि पावर वीडर एक बहुउपयोगी कृषि यंत्र है। सब्जियों, बागवानी फसलों तथा कतार में बोई जाने वाली फसलों के बीच इसका संचालन आसानी से किया जा सकता है। मशीन में लगे घूमने वाले ब्लेड मिट्टी की ऊपरी सतह को भुरभुरा करने के साथ खरपतवार नियंत्रण में भी मदद करते हैं। मॉडल और क्षमता के अनुसार अलग-अलग अटैचमेंट लगाकर इसका उपयोग विभिन्न कृषि कार्यों में किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पावर वीडर की कीमत क्षमता और मॉडल के अनुसार करीब 25 हजार से 45 हजार रुपये या इससे अधिक हो सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अनुसार सेल्फ प्रोपेल्ड पावर वीडर का उपयोग कतार वाली फसलों, सब्जियों और बागवानी फसलों में निराई तथा बीज शैय्या तैयार करने के लिए किया जा सकता है। इससे हाथ से खुरपी द्वारा निराई की तुलना में समय और लागत की बचत होती है।
किसानों के साथ युवाओं के लिए भी रोजगार का अवसर
पावर वीडर खेती की लागत कम करने के साथ ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम भी बन सकता है। किसान या ग्रामीण युवा मशीन खरीदकर आसपास के किसानों को किराये पर कृषि यंत्र सेवा उपलब्ध करा सकते हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर अथवा कृषि यंत्र सेवा केंद्र के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए मशीन उपलब्ध कराकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
छोटी जोत के लिए उपयोगी
डा. देवेश कुमार ने बताया कि ट्रैक्टर की तुलना में पावर वीडर आकार में छोटा और आसानी से संचालित होने वाला यंत्र है। छोटी जोतों तथा संकरी कतारों में इसका उपयोग सुविधाजनक रहता है। खासकर सब्जी और बागवानी फसलों में, जहां बड़े कृषि यंत्रों का संचालन मुश्किल होता है, वहां पावर वीडर उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि खेती में श्रमिकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे समय में पावर वीडर जैसे छोटे और बहुउपयोगी कृषि यंत्र किसानों को समय पर कृषि कार्य पूरा करने में मदद कर सकते हैं। सामूहिक उपयोग, किराये पर उपलब्धता और कस्टम हायरिंग की सुविधा से छोटे किसानों तक कृषि यंत्रीकरण को पहुंचाने में मदद मिलेगी।



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