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गोरखपुर से विश्व साहित्य तक पहुंची संत सौरभ की सद्भाव यात्रा

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क्रोएशिया के प्रोफेसर डॉ. इवान गैचिना ने काव्य में लिखी संत डॉ. सौरभ पाण्डेय की जीवनगाथा

नई दिल्ली: गोरखपुर की धरती से निकली सौहार्द, सेवा और मानवता की सोच अब अंतरराष्ट्रीय साहित्य तक पहुंची है। सौहार्द शिरोमणि, जगत धर्म चक्रवर्ती संत डॉ. सौरभ पाण्डेय के जीवन, विचारों, सामाजिक कार्यों और विश्व सद्भाव की भावना पर आधारित काव्यात्मक जीवनी ‘संत सौरभ: वॉयस ऑफ यूनिवर्सल हार्मनी’ का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन हुआ है। पुस्तक के लेखक क्रोएशिया के प्रोफेसर डॉ. इवान गैचिना, अध्यक्ष, बाल्कनोफैंटास्टिका हैं।

प्रोफेसर डॉ. इवान गैचिना ने संत सौरभ के जीवन और विचारों को काव्य के माध्यम से सरल, भावपूर्ण और मानवीय रूप में प्रस्तुत किया है। पुस्तक केवल एक व्यक्ति की जीवनकथा नहीं है, इसमें शांति, सेवा, प्रेम, सद्भाव और विश्व बंधुत्व की सोच को भी प्रमुखता दी गई है।

पुस्तक में संत सौरभ की धरा धाम की परिकल्पना को विशेष स्थान मिला है। धरा धाम का उद्देश्य अलग-अलग धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों के लोगों के बीच संवाद, परस्पर सम्मान, सहयोग और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना है। इसकी मूल भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम्—पूरा विश्व एक परिवार है’ से जुड़ी है।

कृति में संत सौरभ के 1,200 से अधिक जन चौपाल कार्यक्रमों, सरकारी और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियानों तथा रक्तदान, देहदान जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और मानव सेवा से जुड़े कार्यों का उल्लेख किया गया है।

उनके पारिवारिक जीवन को भी पुस्तक में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उनकी पत्नी डॉ. रागिनी पाण्डेय समाजसेवी, लेखिका और देहदानी हैं। उनकी पुत्री श्वेतिमा माधव प्रिया अंतरराष्ट्रीय बाल व्यास के रूप में पहचान रखती हैं। उनके पुत्र बाल भक्त सौराष्ट्र भगवद्गीता में रुचि रखते हैं। उनके पिता सोमनाथ पाण्डेय किसान रहे हैं।

संत सौरभ के भाई अवनीश पाण्डेय, सविनय पाण्डेय और समीर पाण्डेय भी उनके विचारों और सद्भाव, सेवा एवं मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

यह पुस्तक गोरखपुर के एक किसान परिवार से शुरू हुई संत सौरभ की यात्रा को अंतरराष्ट्रीय साहित्य से जोड़ती है। ‘संत सौरभ: वॉयस ऑफ यूनिवर्सल हार्मनी’ भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और विश्व बंधुत्व के संदेश को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने वाली एक महत्वपूर्ण कृति के रूप में सामने आई है।

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