
गुरु डा. मनोज शुक्ला और चेयरमैन पत्नी रिंकू मणि के साथ कलान पहुंचे नीलमणि, चेयरमैन ने फीता काटा तो गुरु ने नारियल फोड़कर कराया गृह प्रवेश
संतकबीरनगर। कलान गांव के चार अनाथ मासूमों के लिए सोमवार का दिन जिंदगी भर याद रहने वाला बन गया। माता-पिता के स्नेह से वंचित इन बच्चों के दर्द को अपना समझकर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नीलमणि ने न केवल उनका पक्का आशियाना तैयार कराया, बल्कि उनकी गृहस्थी को भी जरूरत के हर सामान से सजा दिया। नीलमणि के इस मानवीय प्रयास की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
सोमवार को नीलमणि अपने गुरु डा. मनोज शुक्ला और हैसर-धनघटा नगर पंचायत की चेयरमैन पत्नी रिंकू मणि के साथ कलान गांव पहुंचे। बच्चों के नए आशियाने को फूलों से सजाया गया था। मकान की रंगाई-पुताई के साथ शौचालय का निर्माण भी पूरा हो चुका था। गांव के संभ्रांत लोगों की मौजूदगी में चेयरमैन रिंकू मणि ने फीता काटकर नए मकान का उद्घाटन किया, जबकि गुरु डा. मनोज शुक्ला ने नारियल फोड़कर गृह प्रवेश की परंपरा निभाई।
इसके बाद नीलमणि ने चारों मासूमों को उनके नए आशियाने की चाबी सौंपी। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। नीलमणि ने करीब एक पखवाड़ा पहले किए अपने वादे को पूरा करते हुए मकान के साथ ही कपड़े, राशन, बिस्तर, बक्सा, आलमारी और रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी उपलब्ध कराया। घर में गृहस्थी का सामान सजाकर उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मासूमों को नए घर में किसी जरूरी चीज की कमी न हो।
दर्द को समझा, जिम्मेदारी निभाई
नीलमणि के इस प्रयास की ग्रामीणों ने जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि माता-पिता के स्नेह से वंचित इन मासूमों के लिए नीलमणि किसी देवदूत से कम नहीं हैं। ग्रामीणों ने कहा कि जरूरतमंदों के प्रति ऐसी मानवीय संवेदना यदि हर जनप्रतिनिधि और सक्षम व्यक्ति में हो तो समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है।
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नीलमणि ने कहा कि इन मासूमों की स्थिति ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था। माता-पिता का प्यार और स्नेह तो वह वापस नहीं ला सकते, लेकिन बच्चों के जीवन को सुरक्षित और संरक्षित बनाने के लिए जो कुछ संभव था, उसे करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देखना ही उनके प्रयास की सबसे बड़ी सफलता है।



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