गांवों में जाते नहीं संबंधित अधिकारी तो कैसे पता चले सच्चाई खुले में शौच जाने को विवश ग्रामीण।
रिर्पोट- जावेद अहमद सेमरियावा
सेमरियावा। सेमरियावा विकास खंड के ग्राम पंचायत भाटपारा मे शौचालय बन गए लेकिन गांववासियों के लिए दिखावा साबित हो रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ब्लाक की सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। शासन का मकसद था शौचालय बनेंगे तो जिनके पास सुविधा नहीं है, वह लोग इनका उपयोग कर सकेंगे। इसके लिए भारी भरकम धनराशि खर्च कर शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इनमें महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। लेकिन, जिम्मेदारों की उपेक्षा से शौचालय निर्माण सार्थक नहीं हो रहा। सामुदायिक शौचालयों में ताले शोभा बढ़ा रहे हैं। गांव वासियों का कहना है की ग्राम प्रधान राम सुमेर इस पर कोई ध्यान नही दे रहे है। इसमें एक दिन भी जरूरतमंद को जाने का मौका नहीं मिला। लोग खुले में शौच जाने को विवश हैं। बारिश में तो बाहर जाना खतरनाक भी है, क्योंकि विषैले जीव जंतुओं का खतरा रहता है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी गांवों को जाना और जन सुविधाओं व समस्याओं को जानना नहीं चाहते। लिहाजा ब्लाक में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए शौचालय निरर्थक साबित हो रहे हैं। इस शौचालयों को बने लगभग डेढ़ वर्ष बीत चुके हैं। इसे अभी तक लोगों के लिए चालू नहीं किया गया है। लोग रास्ता देख रहे हैं कि चालू हो और इसका लाभ मिले। जिम्मेदार भी गंभीरता नहीं दिखा रहे। गांववासियों ने बताया कि सामुदायिक शौचालय बना होने के बावजूद महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में दिक्कतें होती हैं। अधिकारी इसे चालू कराएं तो लोगों को इस सुविधा का लाभ मिल सके।



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